छठ महापर्व 2018

11 नवंबर को नहाय-खाय के साथ चार दिनों के छठ महापर्व की शुरुआत हो चुकी है। यह पर्व उत्तर-पूर्वी भारत में मुख्यतः बिहार, यूपी, झारखंड आदि में बड़ी आस्था से मनाया जाता है। छठ की पूजा में साफ-सफाई और शुद्धता का विशेष ध्‍यान रखा जाता है
छठ का महापर्व जोर शोर से शुरू हो चुका है। दिवाली के बाद कार्तिक महीने में मनाए जाने वाले छठ पूजा त्योहार का एक खास महत्व है। इस त्‍योहार में सूर्य भगवान की पूजा की जाती है। उत्तर भारतीय राज्यों बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में विशेषकर इस त्योहार को मनाया जाता है।
छठ पूजा सनातन धर्म का एक प्रमुख पर्व है।
छठ पूजा सूर्यदेव की उपासना का पर्व है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की खष्ठी को छठ पूजा की जाती है। चार दिनों तक यह पर्व चलता है। सूर्य उपासना का यह महापर्व सूर्य को प्रसन्न करके संतान की मनोकामना तथा कुशलता हेतु मनायी जाती है।छठ देवी सूर्य की बहन हैं लेकिन छठ व्रत कथा के अनुसार छठ देवी ईश्वर की पुत्री देवसेना बताई गई हैं। देवसेना प्रकृति की मूल प्रवृति के छठवें अंश से उत्पन्न हुई हैं। देवी कहती हैं कि यदि तुम योग्य संतान चाहते हो तो मेरी विधिवत पूजा करो।
इस बार छठ का यह पर्व 11 नवंबर को नहाय-खाय से शुरू होकर 14 नवंबर को समाप्‍त होगा।छठ पूजा के धार्मिक महत्व तो हम जानते हैं लेकिन आपको इसके वैज्ञानिक महत्व पता है। ये वैज्ञानिक महत्व स्वास्थ्य से जुड़े हुए हैं। सूर्य एनर्जी देता है और जब आप इसके लिए व्रत रखते हैं तो ये आपको भी उतनी ही एनर्जी से भर देता है। छठ में सुबह मिलने वाली सूर्य की रोशनी आपके शरीर को मजबूती देता है। ये आपको इतनी शक्ति देता है कि आप आसानी से ये व्रत पूरा कर लेते हैं।छठ पूजा सूर्य से जुड़ा है।
सूर्य भगवान न केवल धार्मिक महत्व से पूजे जाते हैं बल्कि ये पॉजिटिव एनर्जी के घोतक भी हैं। छठ के समय सूरज की पराबैगनी किरणें दोगुनी मात्रा में जमीन में पड़ती हैं। इस कारण ये व्रत रखने वाले के लिए बहुत फायदेमंद है। सर्दियों में ये किरणें उनके लिए बहुत फायदेमंद होती हैं जिन्हे गठिया, ब्लड की कमी और हार्ट डिज़ीज हो। ये किरणें शरीर को गर्म रखने में मदद भी करती हैं।
The meaning of the word Chhath is six in Nepali or Hindi Language and as this festival is celebrated on the sixth day of the month of Karthika, the festival is named the same.
पूजा की तिथि तथा मुहूर्त-
13 नवंबर 2018, मंगलवार के दिन षष्ठी तिथि का आरंभ 01:50 मिनट पर होगा जिसका समापन 14 नवंबर 2018, बुधवार के दिन 04:21 मिनट पर होगा।
ये हैं छठ पूजा के 4 दिन एवं पूजा विधि- 
1. पहला दिन नहाय खाय
कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को यह व्रत आरंभ होता है। इसी दिन व्रती स्नान करके नए वस्त्र धारण करते हैं।
2. दूसरा दिन खरना
कार्तिक शुक्ल पंचमी को खरना बोलते हैं। पूरे दिन व्रत करने के बाद शाम को व्रती भोजन करते हैं।

3. षष्ठी
इस दिन छठ पूजा का प्रसाद बनाते हैं। इस दिन ठेकुआ या टिकरी बनाते हैं। प्रसाद तथा फल से बाँस की टोकरी सजाई जाती है। टोकरी की पूजा कर व्रती सूर्य को अर्ध्य देने के लिए तालाब, नदी या घाट पर जाते हैं और स्नान कर डूबते सूर्य की पूजा करते हैं।
4. सप्तमी
सप्तमी को प्रातः सूर्योदय के समय विधिवत पूजा कर प्रसाद वितरित करते हैं।

Day

Date

Ritual

Sunday 11 November 2018 Nahay-Khay
Monday 12 November 2018 Lohanda and Kharna
Tuesday 13 November 2018 Sandhya Argh
Wednesday 14 November 2018 Suryodaya/Usha Argh and Paran

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